पिछले छह वर्षों में सबसे उच्चत्तम स्तर पर पहुंचा जिला ऊना का शिशु लिंगानुपात

पिछले छह वर्षों में सबसे उच्चत्तम स्तर पर पहुंचा जिला ऊना का शिशु लिंगानुपात

सरकार व प्रशासन के प्रयास लाए रंग, जिला ऊना में शिशु लिंगानुपात 938 हुआ

ऊना/सुशील पंडित: बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के सफल क्रियान्वयन से जिला ऊना में लिंगानुपात में काफी सुधार आया है। वर्ष 2011 में शिशु लिंगानुपात चिंताजनक रूप से जिला ऊना में एक हजार लडक़ों के मुकाबले 874 लड़कियां था, जो वर्तमान में बढ़कर 938 हो गया है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन ऊना ने कई अनूठे प्रयास किए हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

जिला ऊना में वर्ष 2015-16 में शिशु लिंगानुपात 908 रहा था, जो 2016-17 में 910 तक पहुंचा। वर्ष 2017-18 में यह 920 हुआ और वर्ष 2018-19 में 923 हो गया। आगे के वर्षो में भी शिशु लिंगानुपात में बढ़ौतरी जारी रही तथा वर्ष 2019-20 में 928 तक पहुंच गया। मौजूदा वर्ष 2020-21 में शिशु लिंगानुपात 938 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।

जिला कार्यक्रम अधिकारी आईसीडीएस सतनाम सिंह ने कहा कि बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ अभियान के तहत प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन लिंगानुपात में सुधार के लिए निरंतर प्रयासरत है, जिसके लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं। बेटियों वाले परिवारों के लिए डीसी कार्ड जारी किए गए, जिसके तहत डीसी कार्ड धारक परिवार को किसी भी सरकारी कार्यालय में संपर्क करने पर प्राथमिकता दी जाती है। इसके साथ-साथ बेटी के नाम पर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के बोर्ड लगवाने के लिए दुकानदारों को प्रोत्साहित भी किया गया। मेरे गांव की बेटी मेरी शान योजना के तहत भी बेटियों के उपलब्धियों के बोर्ड पंचायत घरों व स्कूलों में प्रदर्शित किए जाते हैं।

वहीं उपायुक्त ऊना राघव शर्मा ने कहा कि शिशु लिंगानुपात में सुधार जिला ऊना के लिए प्रसन्नता का विषय है। बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ अभियान की मूल भावना को देखते हुए जिला प्रशासन ने हाल ही में तीन नई योजनाएं आरंभ की हैं। जिनमें गरिमा योजना, संबल योजना व नवजीवन योजनाएं शामिल हैं। महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए गरिमा योजना शुरु की गई है। इस योजना के तहत अपने माता-पिता की देखभाल करने वाली बेटियों के साथ-साथ बेटियों को गोद लेने वाले माता-पिता, बेटी की उच्च शिक्षा व प्रोफेशनल कार्स कराने वालों व इसके लिए ऋण लेने वाले परिवारों तथा बेटियों के आर्थिक सशक्तिकरण में काम करने वाली संस्थाओं को भी सम्मानित किया जाता है।

राघव शर्मा ने कहा कि संबल योजना के तहत बेसहारा व अनाथ बच्चों को सहायता प्रदान की जाती है। ऐसे अति-गरीब परिवार के पात्र बच्चों को मंदिर ट्रस्ट चिंतपूर्णी के माध्यम से संबल योजना के अंतर्गत शिक्षा प्राप्त करने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। जबकि नवजीवन योजना अपने नाम को चरित्रार्थ करते हुए विधवा महिलाओं को आजीविका उपार्जन में मदद करती है। उन्होंने कहा कि अगर कोई विधवा महिला आजीविका के लिए तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त कर अपना काम शुरू करना चाहती है, तो मंदिर ट्रस्ट चिंतपूर्णी के माध्यम से उसे आर्थिक सहायता दी जा सकती है।

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