हिम कुकुट योजना बनी वरदान, मुर्गी पालन में कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग से कमाया लाभ

हिम कुकुट योजना बनी वरदान, मुर्गी पालन में कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग से कमाया लाभ

अरलू के अजय कुमार को योजना में मिला 60 प्रतिशत अनुदान, शेड निर्माण के लिए भी मिले सहायता मिली

ऊना/सुशील पंडित: बेरोजगार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रदेश सरकार अनेकों योजनाओं का संचालन कर रही हैं। पशु पालन विभाग की योजनाएं भी ऐसी ही योजनाएं युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा होकर आगे बढ़ने में मदद कर रही हैं।

हिमाचल प्रदेश सरकार के पशु पालन विभाग की हिम कुकुट योजना का लाभ लेकर बंगाणा उपमंडल के तहत आने वाले अरलू गांव निवासी अजय कुमार आत्मनिर्भर बन गए हैं। वर्ष 2019 में उन्होंने हिम कुकुट योजना के तहत 5000 चूजों से मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू किया। विभाग से उन्हें 60 प्रतिशत सब्सिडी मिली तथा शेड निर्माण के लिए 1.5 लाख की आर्थिक सहायता अलग से मिली। मुर्गियों के पहले दो हैच से उन्हें 50 हजार रुपए प्रति माह की आमदनी हुई।

अजय कुमार कहते हैं “5000 चूजों से मैंने अपना व्यवसाय शुरू किया और आज मेरे फार्म पर 12,000 चूजे हैं। मेरे लिए यह काम काफी लाभकारी सिद्ध हो रहा है। पशु पालन विभाग ने चूजों के विकास और उनमें कोई बीमारी न फैले, इसके लिए भरपूर मदद की है। चूजों के बेहतर विकास के लिए उन्हें फीड के रूप में अजोला घास और अमृत बेल का उपयोग करता हूं। पशु पालन विभाग के डॉक्टर समय-समय पर आकर जांच करते हैं और उनकी महत्वपूर्ण सलाह भी मिलती है। चूजों में किसी प्रकार की बीमारी उत्पन्न न हो, इसके लिए वे चिकस को काड़ा दी देते हैं।”

अरलू निवासी अजय कुमार अब अपने काम को कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की तरफ ले गए हैं। दो कंपनियों के माध्मय से मुर्गी पालन कर उन्हें लाभ हो रहा है। दोनों कंपनियां उन्हें चूजे व फीड उपलब्ध करवाती हैं और 30-35 दिन बाद जब वो बड़े हो जाते हैं तो उनकी खरीद 7 रुपए की दर से की जाती है. जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है। इस योजना के लिए वह मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर व पशु पालन मंत्री वीरेंद्र कंवर का आभार व्यक्त करना भी नहीं भूलते हैं।
अजय कुमार ने कहा कि “बेरोजगार युवा इस कार्य से जुड़कर काफी अच्छा मुनाफा अर्जित कर सकते हैं। मेहनत व विशेषज्ञों की सलाह से मुर्गी पालन लाभप्रद व्यवसाय बन सकता है। ग्रामीण विकास मंत्री वीरेंद्र कंवर भी मेरे पोल्ट्री फार्म का निरीक्षण कर चुके हैं और उन्होंने भी चिकस फार्मिंग को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित भी किया।”
कॉपरेटिव पोल्ट्री फार्मिंग को बढ़ावा देने का प्रयास पशु पालन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी सतिंदर ठाकुर ने बताया कि पशु पालन विभाग ग्रामीण विकास विभाग के सहयोग से विकास खंड बंगाणा में कॉपरेटिव पोल्ट्री फार्मिंग को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है, जिसमें यदि दो या दो से ज्यादा किसान मिलकर पोल्ट्री फार्मिंग करना चाहते है, तो उन्हें दो लाख रूपए की सहायता प्रदान की जाता है।

डॉ. सतिंदर ठाकुर ने कहा कि बंगाणा उप-मंडल के तहत इस प्रकार के लगभग 30 यूनिट स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें लगभग 100 लोगों को रोजगार भी प्राप्त होगा। दो लाख रूपए के निवेश में लगभग तीन हजार की क्षमता वाला फार्म तैयार हो जाता है।

बेरोजगार युवा पशु पालन विभाग से करें संपर्क
वहीं पशु पालन मंत्री वीरेंद्र कंवर ने बताया “बेरोजगार युवाओं को रोजगार प्रदान करने और किसानों की आय बढ़ाने के मकसद से सरकार ने हिम कुक्कुट योजना शुरू की है, जिसके तहत पशुपालन विभाग चयनित लाभार्थियों को चूजे प्रदान करेगा तथा एक मुर्गीपालक को तीन किस्तों में तीन हजार चूजे दिए जाते हैं। एक किस्त में एक हजार, दूसरी किस्त में 45 दिनों के भीतर एक हजार और तीसरी किस्त में भी एक हजार चूजे किसान को प्रदान किए जाते हैं। हिम कुकुट योजना में प्रदेश सरकार 60 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान करती है, जबकि 40 प्रतिशत खर्च किसान को वहन करना होता है। वहीं फीड व शेड बनाने के लिए विभाग की तरफ से एक लाख बीस हजार रुपए का अनुदान दिया जा रहा है।”

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