न्यायधीश भगवान शनि देव का केक काटकर शनि जंयती मनाई गई: राकेश भार्गव

न्यायधीश भगवान शनि देव का केक काटकर शनि जंयती मनाई गई: राकेश भार्गव

कपूरथला/चन्द्र शेखर कालिया: 10 जून शनि अमावस्या पर भगवान शनि देव को भोग लगा कर शनि जयंती बहुत धूमधाम से मनाई गई। भगवान शनि देव के उपासक राकेश भार्गव ने अपने समस्त साथियों सहित कुल देवता भगवान शनि देव के भजन संकीर्तन करके व भगवान को फल फूल प्रसाद का भोग लगा कर व केक काटकर भगवान शनि देव जी की जयंती मनाई।

इस शुभ मौके पर राकेश भार्गव ने बताया की शनि जयंती हर ज्येष्ठ अमावस्या के दिन भगवान शनि देव की जयंती मनाई जाती है। भार्गव ने भगवान शनि देव की महिमा का गुणगान करते हुए कहा की शनि देव बहुत ही दयालु और करपालु है। सदेव अपने भगतों पर किरपा बरसाते है। न्याय के अधिपति देवता है। भगवान शिव की तपस्या से इन्हे ग्रह का वरदान मिला था और उन्ही ने इनकी तपस्या से प्रभावित होकर न्यायधीश की उपाधि दी और कहा आज के बाद तुम पूरी सृष्टि के न्याय के देवता हो। तुम ही व्यक्ति के अच्छे बुरे कर्मो का उसे फल दोगे इसलिए सृष्टि के आरंभ से ही भगवान शनि देव जातक की राशि में आकर उसके अच्छे बुरे कर्मो का भुगतान करते है। शनि देव हर जीव को प्रभावित करते है। चाहे वोह जीव इंसान हो या फिर जानवर चाहे वस्तु हो भगवान जब किसी को ढैया या साढ़ेसती के रूप में आते है तो उस व्यक्ति को उसके अच्छे बुरे कर्मो का फल देते है।

इस मौके पर आचार्य दिनेश शास्त्री जी ,सतीश शास्त्री जी ने कहा की शनि देव मां छाया के पुत्र थे। ओर इनके पिता भगवान सूर्य थे। यमराज इनके भाई और यमुना और भद्रा इनकी बहने थी। उन्होंने बताया की शनि देव के दंड से कोई नहीं बच सकता चाहे देव हो राजा महाराजा सभी को इनकी दशा का अपने कर्मो के अनुसार प्रकोप सहना पढ़ता है। इसलिए व्यक्ति को हमेशा सत कर्म करने चाहिए । ओर कहा जो व्यक्ति शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे शनि वार को तेल का दीपक जगाता है और सात परिक्रमा करता है। उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। इस मौके नीरेंद्र कुमार,विनोद कुमार, रौनक भार्गव,संजीव कुमार, सोनू शर्मा ,रमेश कुमार जी उपस्थित थे।

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