पंजाब: कैप्टन को बख्शने के मूड में नहीं हैं नेता

पंजाब: कैप्टन को बख्शने के मूड में नहीं हैं नेता

नई दिल्लीः ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के पैनल ने सोनिया गांधी को पंजाब में जारी आंतरिक कलह पर रिपोर्ट सौंप दी है। कहा जा रहा है कि पैनल ने सिफारिश की है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह प्रमुख बने रहने चाहिए। हालांकि, राज्य के असंतुष्ट पार्टी नेताओं को यह नागवार गुजरा है। खबर है कि गुरुवार को इसके संबंध में भविष्य की प्लानिंग के लिए एक बैठक भी आयोजित की गई थी।

पंजाब कांग्रेस के कई नेता अपना रुख बदलने के मूड में नहीं हैं। रिपोर्ट में एक वरिष्ठ पार्टी नेता के हवाले से कहा गया है, ‘सीएम ने चुनाव के बाद के वादे पूरे नहीं किए हैं इसलिए हम नेतृत्व में बदलाव के लिए ज्यादा विधायकों को मना रहे हैं। इससे कम हमें कुछ नहीं चाहिए।’ बीते हफ्तों में कांग्रेस के तीन सदस्यीय पैनल ने राज्य को 150 नेताओं से चर्चा की थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, असंतुष्ट नेताओं ने यह साफ किया है कि असल मुद्दा कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच का नहीं है, बल्कि उनकी तरफ से बेअदबी और पुलिस गोलीबारी समेत कई अन्य मामलों को लेकर उठाई गई बात चिंता का विषय है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी जल्द ही इस मामले पर बैठक कर सकती हैं। असंतुष्ट नेताओं को उम्मीद है कि फैसला लेते वक्त हाईकमान उनकी बात पर भी गौर करेगी।

एक सदस्य के हवाले बताया गया है कि कमेटी ने पांच बड़ी सिफारिशें की हैं। इनमें सिंह को प्रभारी बनाए रखने, सिद्धू को पार्टी में बड़ा पद या शीर्ष मंत्री बनाया जाए, पार्टी संगठन में सुधार, हाशिये पर पहुंची जातियों के साथ संपर्क और दलितों को अहम पद देने और बोर्ड्स और कॉर्पोरेशन में पार्टी नेताओं की नियुक्ति की बात शामिल है।

केवल तीन राज्य हैं, जहां कांग्रेस बगैर गठबंधन के सरकार में है। राजस्थान में भी आंतरिक कलह जारी है। ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये विवाद अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पंजाब सरकार को बचे हुए महीनों में जमकर काम करना होगा। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई है कि अकाली दल और बीजेपी को हल्के में ना लिया जाए। पैनल में राज्यसभा सदस्य मल्लिकार्जुन खड़गे, पंजाब के पार्टी प्रभारी हरीश रावत और दिल्ली के पूर्व सांसद जय प्रकाश अग्रवाल शामिल हैं।

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