महामारी ने शिक्षकों के लिए कई अवसर खोल दिए हैं: प्रो उज्जवल चौधरी

महामारी ने शिक्षकों के लिए कई अवसर खोल दिए हैं: प्रो उज्जवल चौधरी

तकनीकी पहलुओं पर समय के साथ बदलने की योजना

कॉलेज द्वारा आयोजित सात दिवसीय कार्यशाला का तीसरा दिन

कपूरथला/चंद्र शेखर कालिया: स्‍थानीय ह‍िन्‍दू कन्‍या कॉलेज के इंटरनल कुआल‍िटी ऐशुरैंस सैल की और से सात द‍िवसीय कैपेस‍िटी ब‍िल्‍डिंग वर्कशाप के तीसरे द‍िन आज एडम्स यूनिवर्सिटी कोलकाता के प्रो वाइस चांसलर प्रो उज्जवल चौधरी ने आज वेबिनार के माध्यम से संबोधित किया।

उन्होंने कहा कि इस महामारी ने एक तरफ श‍िक्षा को को बहुत प्रभावित किया है लेकिन शिक्षकों को नई तकनीक सीखने और दूर बैठे बच्चों तक पहुंचने के अवसर प्रदान किए हैं ।

प्रो चौधरी नैक एसएसआर से संबंधित अन्य कॉलेजों से जुड़े 200 से अधिक प्रतिभाओं से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज पुरातन शिक्षण विधि को छोड़ने और नए तरीके अपनाने की जरूरत है। ऑनलाइन टीचिंग भले ही आज के समय में इतनी कारगर न हो लेकिन निकट भविष्य में ऑनलाइन टीचिंग अहम भूमिका निभाने वाली है। आज शिक्षकों को खुद को बदलने और नई तकनीकों से परिचित होने की जरूरत है । उन्होंने शिक्षकों को कई तरह के सॉफ्टवेयर, एप और प्लेटफॉर्म के बारे में बताया और कहा कि वे उनका इस्तेमाल नैक में अच्छा स्कोर करने के लिए कर सकते हैं। उन्होंने शिक्षकों को बेहतर तरीके से छात्रों से जुड़ने के टिप्स भी दिए और कहा कि आज क्लास का माहौल खुश रखने की जरूरत है क्योंकि सभी जगह महामारियों के कारण लोग तनाव में हैं।

उन्होंने शिक्षण, प्रशिक्षण और मुल्‍यांकन को डिजिटल रूप से प्रभावी बनाने के विभिन्न पहलुओं पर भी प्रकाश डाला । बाद में उन्होंने इस कार्यशाला में शिक्षण, प्रौद्योगिकी, चुनौतियों और अवसरों से जुड़े सवालों का ब्यौरा दिया। उन्होंने कहा कि कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के आगे भी छात्रों के साथ सही तरीके से जुड़ने की चुनौती है।

प्रो चौधरी ने विभिन्न सरकारों द्वारा श‍िक्षा के प्रति उदासीनता और चिंता भी व्यक्त की और कहा कि ऐसा करने से श‍िक्षा को भी काफी नुकसान हुआ है।

इससे पहले कार्यशाला के समन्वयक डॉ. कुलविंदर कौर ने मुख्य वक्ता की उपलब्धियों से सभी का परिचय कराया और उनका स्वागत किया। वेबिनार संचालन प्रो अनुपम सभ्रवाल ने किया। वैबिनार के शुरू में कॉलेज के छात्रों ने प्रार्थना की कि मानवता कोरोना महामारी से जल्दी छुटकारा पाएं । अंत में प्राचार्य डॉ. अर्चना गर्ग ने मुख्य वक्ता व सभी प्रतिभागी शिक्षकों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि बदलते समय के अनुसार शिक्षक भी खुद को अपग्रेड करेंगे और छात्रों के साथ बेहतर तालमेल बना सकेंगे।

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