प्राइवेट कर्मचारियों के लिए खुशखबरी!

प्राइवेट कर्मचारियों के लिए खुशखबरी!

नई दिल्ली. करोड़ों कर्मचारियों के लिए मोदी सरकार अहम फैसला लेने जा रही है. खबर है कि 1 अक्टूबर से केन्द्र की मोदी सरकार लेबर कोड के नियमों को लागू कर सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सरकार 1 जुलाई से लेबर कोड के नियमों के लागू करना चाहती थी लेकिन राज्य सरकारों के तैयार नहीं होने के कारण अब 1 अक्टूबर से लागू करने का टारगेट रखा गया है. 1 अक्टूबर से लेबर कोड के नियमों को माना जाता है तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 15000 रुपये से बढ़कर 21000 रुपये हो सकती है.

दरअसल, लेबर कोड के नियमों को लेकर लेबर यूनियन मांग कर रही थी कि कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी को बढ़ाकर 15000 रुपये से 21000 रुपये किया जाना चाहिए. अगर ऐसा होता है तो आपका वेतन बढ़ जाएगा. नए ड्राफ्ट रूल के अनुसार, मूल वेतन कुल वेतन का 50% या अधिक होना चाहिए. इससे ज्यादातर कर्मचारियों की वेतन का स्ट्रक्चर में बदलाव आएगा. बेसिक सैलरी बढ़ने से PF और ग्रेच्युटी के लिए कटने वाला पैसा बढ़ जाएगा क्योंकि इसमें जानें वाला पैसा बेसिक सैलरी के अनुपात में होता है. अगर ऐसा होता है जो आपके घर आने वाली सैलरी घट जाएगी रिटायरमेंट पर मिलने वाला PF और ग्रेच्युटी का पैसा बढ़ जाएगा. लेबर यूनियन इसका विरोध कर रहीं थी और इन नए नियम के बाद वह कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी को बढ़ाकर 21000 रुपये किये जाने की मांग कर रहीं थी.

लेबर मिनिस्ट्री के मुताबिक, सरकार लेबर कोड के नियमों को 1 जुलाई से नोटिफाई करना चाहते थे लेकिन राज्यों ने इन नियमों को लागू करने के लिए और समय मांगा जिसके कारण इन्हें 1 अक्टूबर तक के लिए टाल दिया गया. अब लेबर मिनिस्ट्री और मोदी सरकार लेबर कोड के नियमों को 1 अक्टूबर तक नोटिफाई करना चाहती है,संसद ने अगस्त 2019 को तीन लेबर कोड इंडस्ट्रियल रिलेशन, काम की सुरक्षा, हेल्थ और वर्किंग कंडीशन और सोशल सिक्योरिटी से जुड़े नियमों में बदलाव किया था. ये नियम सितंबर 2020 को पास हो गए थे.

ग्रेच्युटी और पीएफ में योगदान बढ़ने से रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली राशि में इजाफा होगा. पीएफ और ग्रेच्युटी बढ़ने से कंपनियों की लागत में भी वृद्धि होगी. क्योंकि उन्हें भी कर्मचारियों के लिए पीएफ में ज्यादा योगदान देना पड़ेगा. इन चीजों से कंपनियों की बैलेंस शीट भी प्रभावित होगी.

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