चाइना के करोना वायरस ने छीनी भारत के दवा उद्यमियों नींद

चाइना के करोना वायरस ने छीनी भारत के दवा उद्यमियों नींद

कच्चा माल न आने से दवाओं के हो जाएंगे दोगुणा दाम

कच्चे माल के लिए भारत रहता है चाईना पर निर्भर

चाईना में केरोना वायरस फैलने से माल आना हुआ बंद

जल्द ही माल आना शुरू नहीं हुआ तो प्रदेश के अधिकांश उद्योग हो जाएंगे बंद

केंद्र सरकार के दवा उद्योगों को कच्चा माल उपलब्ध कराने की खुली पोल

बद्दी/सचिन बैंसल। प्रदेश का सबसे बड़ा बद्दी का फार्मा हब कच्चा माल न आने से हांफने लगा है। अगर जल्द ही कच्चा माल उपलब्ध नहीं हुआ तो आने वाले समय में प्रदेश के अधिकांश उद्योग बंद हो जाएंगे। प्रदेश का 85 फीसदी कच्चा माल चाईना से आता है और चाईना में करोना वायरस फैलने से माल आना पूरी तरह से बंद हो गया है। हिमाचल समेत पूरे देश की चाईना पर निर्भरता इतनी ज्यादा है कि अगर वह केवल कच्चा माल ही बंद कर देता है तो देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो जाती है। उद्योग पतियों का कहना है कि अगर चाईना अपना कच्चा माल देना ही बंद करती है तो उसे वल्ड वार की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
पिछले एक माह से चाईना करोना वायरस के चपेट में आने से हजारों लोग मौत का शिकार हो गए है। इसका असर भारत के फार्मा उद्योग पर सबसे ज्यादा पड़ा है। भारत में 85 से 90 फीसदी कच्चा माल चाईना से आता है। अचानक माल बंद होने से हिमाचल का सबसे बड़ा हब बद्दी भी पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। माल न आने से जिन लोगों के पास कच्चा माल स्टाक में था। उन्होंने वायरस फैलते ही कच्चा माल के दाम कई गुणा बढ़ा दिए है। 33 हजार रुपये में मिलने वाला कच्चा माल 70 हजार तक बिक रहा है। अब देश में जो कच्चा माल स्टाक में था वह भी नहीं रहा है। अब हालत यह है कि एक मार्च माह तक कच्चा माल की सप्लाई नहीं हुई तो कई दवाईयां बननी बंद हो जाएगी। कच्चा माल न आने से पैरासिटामोल (पीसीएम) जो पहले 255 रुपये किलो था अब वह 455 रुपये हो गया है। नीमोस्लाईड जो पहले 6 सौ रुपये किलो था अब वह 14 सौ रुपये किलो हो गया है। अस्किलोफिनास जो पहले 800 रुपये किलो था वह अब 1600 रुपये किलो हो गया है। एंटीबायटिक दवाईयों के दाम भी दो गुणा हो गए है। गैस की दवाईयों की ड्रम में दसहजार रुपये की वृद्धि हुई है। यही नहीं एलर्जी की दवाई मोंटीलुकास्ट दवा की कच्चे माल की दवा दो गुणा बढ़ गई है।

1- उधर, हिमाचल प्रदेश दवा निर्माता संघ के प्रदेश अध्यक्ष एवं लघु उद्योग भारत की फार्मा विंग के राष्ट्रीय प्रधान राजेश गुप्ता ने बताया कि भारत में जो भी कच्चा माल था वह दवा निर्माताओं ने कई गुणा अधिक दामों में खरीद लिया है।

अब कच्चा माल भारत में समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा कि चाईना से वल्र्ड वार की बात होती है। लेकिन अगर चाईना केवल कच्चा माल देना ही बंद कर देता है तो भारत की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अभी मार्च तक तो उद्योगों के पास कच्चा माल है लेकिन उद्योग प्रबंधकों की माल तैयार करने व बेचने की चेन टूटने से आने वाले समय में उद्योगों के लिए खतरा बना हुआ है। भारत को चाईना के अलावा दूसरे देश पर कच्चे माल के लिए निर्भरता रखना जरूरी है। अन्यथा कभी भी ऐसी समस्या दोबारा भी आ सकती है।

2-बद्दी के क्योरटेक फार्मा के संचालक ने बताया कि कच्चा माल न आने से दवाईयों का दाम कई गुणा बढ़ जाएगी।

पैरासिटामोल, निमो स्लाईड, गैस, एलर्जी व दर्द निवारक दवाईयां बननी ही बंद हो जाएंगी। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में सर्जिकल दवाईयां भी मिलनी बंद हो जाएंगी। उन्होंने उमीद जताई की मार्च में चाईना खुल जाएगा। उसके बाद स्थिति में सुधार हो सकता है।

3-हिमाचल प्रदेश ट्रेडर प्रकोष्ट के सदस्य कृष्ण कौशल ने कहा कि भारत की विदेश नीति काफी मजबूत है। दवा उद्योग के लिए कच्चा माल किसी दूसरे देश से भी मंगवाया जा सकता है।

भारत ने पहले भी चाईना से कई उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया था उसके बावजूद भी देश की मांग पूर्ति में कोई बाधा नहीं आई है। भारत देश किसी एक देश पर निर्भर नहीं है। अगर कच्चा माल चाईना से नहीं आ रहा है तो किसी और देश से भी मंगवाया जा सकता है। भारत क ा व्यापार सब देशों के खुला है। किसी के साथ प्रतिबंधित नहीं है। पूरा विश्व बाकी पड़ा है। मोदी को कुछ भी मुमकिन नहीं है। उद्योग पतियों को मन बड़ा करके चलने की जरूरत है।
उधर, ड्रग कंट्रोलर मनीष ने कच्चा माल न आने की पुष्टि करते हुए बताया कि चाईना बंद होने से यह समस्या आई है। मार्च में चाईना खुलने की उमीद है और उसके बाद कच्चा माल की कोई कमी नहीं रहेगी।

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