आखिर किसकी शह पर बिना परमिशन हुआ खैरों का कटान!…

लमलैहड़ी में ठेकेदार की दबंगई, वन विभाग ने जब्त किए खैर के 130 मोछे…

ऊना (रोहित शर्मा,सुशील पंडित)।
 लमलैहड़ी में बिना परमिशन के खैरों के कटान का मामला काफी चर्चा में आ गया है। इस संबंध में विभिन्न अखबारों में समाचार प्रकाशित होने के बाद वन विभाग हरकत में तो आया है, लेकिन बिना परमिशन खैरों का कटान होने के संबंध में विभाग कोई जवाब नहीं दे पा रहा। फिलवक्त फौरी कार्रवाई के तहत वन विभाग ने खैर के 130 मोछे जब्त कर लिए हैं, जो करीब 35 क्विंटल बनते हैं। जांच के दौरान विभागीय अधिकारियों को खैर के 29 ठूंठ भी मिले हैं। विभाग के मुताबिक पकड़े गए खैर के मोछे सूखे हैं और संभवत: सूखे पेड़ काटे गए हैं। विभाग अभी जांच में जुटा है कि खैर के ये पेड़ सरकारी भूमि से काटे गए हैं या मलकीयती भूमि से खैरों का कटान हुआ है। इसके बाद विभाग यह पता लगाएगा कि मलकीयती भूमि से जो पेड़ कटे हैं ये भूमि मालिक की सहमति से किसी ठेकेदार ने काटे हैं या फिर मलकीयती भूमि से भी चोरी छिपे पेड़ों का कटान हुआ है। लब्बोलुआव यह है कि लमलैहड़ी से खैरों के पेड़ कटे और मामला उजागर होने पर विभाग हरकत में आया और कटा हुआ माल जब्त भी कर लिया। लेकिन हैरत की बात तो यह है कि दो दिन बाद भी विभाग यह पता लगाने में असमर्थ है कि पेड़ किसने काटे? जबकि बताया यह जा रहा है कि मंगलवार को जब विभागीय अधिकारी या कर्मचारी मौके पर पहुंचे तो वहां एक कथित ठेकेदार ने इन्हें यह कहकर चलता कर दिया कि उसकी पहुंची बहुत ऊंची है और विभाग इस मामले में जो करना चाहता है कर सकता है। कथित रूप से उक्त ठेकेदार की ऐसी धमकी सुनकर विभागीय अमला मौके से वापस लौट आता है और दूसरे दिन मीडिया में हंगामा होने के बाद विभाग फिर हरकत में आया और अवैध रूप से काटे गए पेड़ों को जब्त कर लिया गया है। समाचार लिखे जाने तक मामले की प्राथमिकी दर्ज नहीं हो पाई है।
डिप्टी रेंजर को सौंपा जांच का जिम्मा
जिला वन अधिकारी मृत्युंज्य माधव ने बताया कि कटा हुआ माल जब्त करने के साथ इसकी जांच भी शुरू कर दी गई है। डिप्टी रेंजर को जांच का जिम्मा सौंपा गया है। विभाग यह पता लगाएगा कि यह कटान भूमि मालिक की मर्जी से हुआ है अथवा वन कटुओं ने अवैध रूप से चोरी छिपे पेड़ों को काटा है। यह कटान यदि भूमि मालिक की मर्जी से भी हुआ तो भी यह अवैध है और भूमि मालिक के साथ खैर कटान का कथित ठेकेदार भी दोषी पाया जाएगा।
सूखे पेड़ों के कटान की अभी कोई परमिशन नहीं
विभागीय अधिकारियों की मानें तो जब्त की गई खैर की लकड़ी सूखे खैर की है। जिले में अभी तक किसी भी ठेकेदार को सूखे पेड़ों के कटान की परमिशन नहीं दी गई है। बिना परमिशन के इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों का कटान कई सवाल पैदा कर रहा है। बेशक किसी ने परमिशन के लिए अप्लाई किया है, लेकिन जब तक परमिशन नहीं मिल जाती तब तक एक पेड़ का कटान भी अवैध माना जाएगा। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों का हुआ कटान और कथित रूप से ठेकेदार की धौंस इशारा करती है कि इसके पीछे किसी प्रभावशाली व्यक्ति का हाथ हो सकता है। बहरहाल वन विभाग मामले की जांच में जुटा है और जल्द ही इसका खुलासा होने की भी उम्मीद है।
डीएफओ ऑफिस में हुई जोरदार चर्चा
मामला उजागर होते ही मंगलवार शाम को भी विभाग की एक टीम मौके पर गई थी, लेकिन वहां से बैरंग वापस लौट आई थी। सूत्र बताते हैं कि इसी संदर्भ में मंगलवार को डीएफओ ऑफिस में विभागीय अधिकारियों के बीच चर्चा हुई। इस बैठक के दौरान कभी परमिशन को लेकर बहस हुई तो कभी इस मामले की गंभीरता पर माहौल गर्म हुआ। अंतत: तय यह हुआ कि मामले की विभागीय जांच शुरू की जाए और जो भी इस मामले में दोषी है, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाए। नतीजतन वन विभाग की टीम मौके के लिए रवाना हुई और खैर के मोछे जब्त किए गए।

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