पंजाब : 22 मरले जगह का कोर्ट के आर्डर से कब्जा दिलाने आये तहसीलदार बिना कब्ज़ा दिलाये गए वापिस, देखें वीडियो

पंजाब : 22 मरले जगह का कोर्ट के आर्डर से कब्जा दिलाने आये तहसीलदार बिना कब्ज़ा दिलाये गए वापिस, देखें वीडियो

मोगा : मट्टा वाली बस्ती में हलात उस समय तनावपूर्ण होते होते शांत हो गए, जब तहसील दार लखविंदर सिंह ने अपनी सूझ बूझ से प्रापर्टी का कब्जा लेने आए प्रॉपर्टी मालिक को साइड पर कर दिया। वही जानकारी के मुताबिक मट्टा वाली बस्ती में करीब 44 मरले जगह नरिंदर कुमार तुली को पाकिस्तान से रिफूजी तोर पर क्लेम द्वारा मिली थी और उसमें से कुछ जगह उन्होंने बेच दी थी। कुछ जगह किराये पर दी पहले तो यह किरायेदार किराया देते रहे। लेकिन जब नरिंदर तुली का परिवार 1988 में दिल्ली शिफ्ट हो गया और उसके बाद इन लोगों ने किराया देना बंद कर दिया और इस प्रापर्टी को अपनी मालकी बताने लगे और फिर इस जगह का मालकी हक का केस अदालत में शुरू हुआ और करीब 30 साल से ऊपर अदालत में लोअर कोर्ट से हाईकोर्ट तक चला और इसकी मालकी नरिंदर तुली के नाम साबित हो गई। वही हाईकोर्ट ने निचली अदालत को कब्जा दिलाने के आदेश दिए वही उन्होंने आदेशों की पालना करते हुए मोगा के तहसीलदार लखविंदर सिंह पुलिस और वेलफ के साथ कब्ज़ा दिलाने पहुंचे और मोके पर हालात बिगड़ते हुए देख कर तहसीलदार और वेलफ बिना कब्ज़ा दिलाये वापिस चले गए।

वही कब्ज़ा धारकों ने कहा की मालिक हमारे साथ धक्का कर रहा है। हम 1947 से पाकिस्तान से आकार यहां पर बेठे है। हमको नहीं मालूम की यह इस जगह का मालिक है हमारा कोर्ट में अभी भी केस चल रहा है। हमारी पिछली कई पीढ़ियां यहाँ पर रहती रही है और आगे भी अब हम रह रहे है और यह प्रॉपर्टी हमारी है। हम दस परिवार यहाँ पर रह रहे है और हमारा केस चल रहा है। यह कभी भी हमें नहीं मिला और हम को परेशान कर रहे है हम मालिक है। वही कब्ज़ा दिलाने आये मोगा के तहसीलदार लखविंदर सिंह और कोर्ट के वेलफ सुखदीप सिंह ने बताया कि वह अदालत के हुक्म के मुताबिक यहाँ पर कब्ज़ा दिलाने के लिए यहाँ आये थे। लेकिन यहाँ के हालत बिगड़ते देख कर और पुलिस की कमी होने के कारण हम वापिस बिना कब्ज़ा दिलाये जा रहे है।

क्योंकि यहाँ पर हलात बिगड़ सकते थे अब कोर्ट जो अगले आदेश देगी उसके मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। वही इस मोके प्रॉपर्टी मालिक के बेटे नरिंदर तुली ने बताया की यह प्रॉपर्टी जब वह पाकिस्तान से भारत रिफूजी के तौर पर आये थे। तो उनके पूर्वजों की कलम में मिली थी और इसमें से कुछ हिस्सा हमने बेच दिया था और आधा हिस्सा इन लोगों को किराये पर दिया था। पहले तो यह लोग हमें किराया देते रहे। लेकिन 1988 में हम लोग मोगा छोड़ कर दिल्ली शिफ्ट हो गए और उसके बाद इन लोगो ने हमे किराया आदि देना बंद कर दिया और हमारी प्रॉपर्टी पर कब्ज़ा कर लिया और अब यह जगह अपनी बता रहे है हम ने निचली कोर्ट से हाई कोर्ट तक केस चलाये और हमारी जीत हुई। अब हाईकोर्ट ने निचली अदालत को हमे कब्ज़ा दिलाने के आदेश दिए और जब आज अधिकारी कब्ज़ा दिलाने आये तो यहाँ के हलात नाजुक होते देख वापिस चले गए और हमे कब्ज़ा नहीं मिला अब जो आगे अदालत आदेश देगी उसके मुताबिक अधिकारी करवाई करेंगे।