अशोक चक्र विजेता शहीद कैप्टन अरुण जसरोटिया का 25वां श्रद्धांजलि समारोह आयोजित

अशोक चक्र विजेता शहीद कैप्टन अरुण जसरोटिया का 25वां श्रद्धांजलि समारोह आयोजित

पठानकोट/अजय सैनी)। भारतीय सेना की 9 पैरा स्पेशल फोर्स यूनिट के अशोक चक्र विजेता शहीद कैप्टन अरुण जसरोटिया का 25वां श्रद्धांजलि समारोह शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की की अध्यक्षता में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए उनके निवास स्थान सुजानपुर में आयोजित किया गया। जिसमें परिषद के अध्यक्ष कर्नल सागर सिंह सलारिया बतौर मुख्य मेहमान शामिल हुए। इनके अलावा शहीद के पिता कर्नल प्रभात जसरोटिया, भाई एक्सियन राकेश जसरोटिया, भाभी नीलम जसरोटिया, भतीजा अमन जसरोटिया व भतीजी अंतराजसरोटिया, इंडियन एक्स सर्विसमैन लीग पंजाब के उप प्रधान कैप्टन फकीर सिंह,शहीद सिपाही मक्खन सिंह के पिता हंस राज, कैप्टन बी.आर शर्मा आदि ने विशेषमेहमान के तौर पर शामिल होकर शहीद कैप्टन अरुण जसरोटिया को श्रद्धासुमनअर्पित किए। सर्वप्रथम मुख्यातिथि व अन्य मेहमानों ने शहीद के चित्र के समक्ष ज्योतिप्रज्जवलित व पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस श्रद्धांजलि समारोहको संबोधित करते हुए मुख्यातिथि कर्नल सागर सिंह सलारिया ने कहा कि शहीदकैप्टन अरुण जसरोटिया जैसे अमर बलिदानियों की बदौलत ही राष्ट्र की एकता वअखंडता बरकरार है। जिन्होंने 27 वर्ष की अल्पायु में अदम्य साहस का परिचय देतेहुए वीरता का जो इतिहास रचा ऐसे शूरवीरों की अमूल्य शहादत व शौर्य केसमक्ष समूचा राष्ट्र नतमसतक है। उन्होंने कहा कि जिस घर का चिराग राष्ट्र कीबलिवेदी पर कुर्बान हो जाता है। उसके जाने के बाद उसका परिवार एक जिंदालाश बन कर रह जाता है ऐसे में सरकारों के साथ साथ समाज के बाकी लोगोंका यह फर्ज बनता है कि इन शहीद परिवारों को उचित मान सम्मान देकर उनकेलाडलों की शहादत की गरिमा को बहाल रखें आतंकियों पर मौत बनकर टूटपड़े थे इस अवसर महासचिव कुंवररविंदर सिंह विक्की ने कहा कि शूरवीरता का दूसरा नाम है कैप्टन अरुणजसरोटिया, जिन्हें लोलाब घाटी के टाइगर के रुप में जाना जाता था, जिन्होंने25 वर्ष पहले जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा सेक्टर की लोलाब घाटी में छिपे हुएआतंकियों पर मौत बनकर टूट पड़ते हुए उन्हें मारकर अपने साथी सैनिकों केप्राणों को बचाते हुए कश्मीर की वादियों में वीरता का जो इतिहास रचा उसकीमिसाल अन्य कहीं नहीं मिलती है। उनकी बहादुरी को देखते हुए देश के तत्कालीनराष्ट्रपति डॉ शंकर दयाल शर्मा ने जहां उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से नवाजावहीं उस समय की पंजाब सरकार ने उन्हें निशान ए खालसा अवार्ड से सम्मानित करशहीद कैप्टन अरुण जसरोटिया की शहादत को सजदा किया था।

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