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Saturday, December 5, 2020 Search Search YouTube Menu

प्रदेश वरिष्ठ उपप्रमुख राजेश भार्गव के नेतृत्व में शिव सेना हिन्द में शामिल हुए युवा

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किसान दुखी है तो देश कैसे खुश रह सकता: दीपक छाबड़ा

कपूरथला (चंद्रशेखर कालिया)। शिव सेना हिन्द भर्ती अभियान के तहत शिव सेना हिन्द की बैठक आयोजित की गई।यह बैठक प्रीत नगर में निजी आवास में आयोजित हुई।बैठक में शिव सेना हिन्द यूथ विंग के राष्टीय उप प्रमुख दीपक छाबड़ा मुख्य अतिथि के रुप में शामिल हुए।साथ ही प्रदेश के उप प्रमुख नीलम शर्मा,पंजाब उपाध्क्षय संजीव सोनू एवं वरिष्ठ नेता नीरज शर्मा भी शामिल हुए।बैठक में शिव सेना हिन्द भर्ती अभियान के तहत शिव सेना हिन्द के प्रदेश वरिष्ठ उप प्रमुख राजेश भार्गव के नेतृत्व में शुकरवार को सुल्तानपुर लोधी व अन्य गांवों के अनेकों युवाओं ने शिव सेना हिन्द का दामन थामा।पार्टी में युवाओं का स्वागत करते हुए शिव सेना हिन्द यूथ विंग के राष्टीय उप प्रमुख दीपक छाबड़ा ने कहा कि युवा ही देश का भविष्य हैं और आज देश का युवा शिव सेना हिन्द के साथ है।इस दौरान शिव सेना हिन्द में शामिल होने वाले युवाओं में प्रमुख रूप से रेशव शर्मा,धरमिंदर शर्मा,अजय शर्मा आदि अनेक युवा शामिल थे।

सभी युवाओं का शिव सेना हिन्द में स्वागत करते हुए दीपक छाबड़ा ने युवाओं का आह्वान किया कि वे शिव सेना हिन्द की नीतियों को जन-जन तक पहुंचायें।दीपक छाबड़ा ने कहा कि देश का किसान मुगलों और अंग्रेजों के समय गरीब हुआ था,लेकिन देश आजाद होने के बाद वह कर्जदार हो गया।किसानों के कर्ज और गरीबी को फसलों की लागत का डेढ़ गुना मूल्य देकर ही खत्म किया जा सकता है।दीपक छाबड़ा ने कहा कि किसान खुद भी जैविक खेती कर और अपने खेतों में रासायनिक के बजाए देशी खाद प्रयोग की उपज बढ़ा सकते हैं।उन्होंने कहा कि 500 साल पहले कारखानों के कारण नहीं बल्कि समृद्ध खेती के कारण देश सोने की चिड़िया था।फिर मुगलों और अंग्रेजों के समय में किसान गरीब हुआ, लेकिन देश को आजादी मिलने के बाद किसान कर्जदार हुआ है। आज देश के 13 करोड़ किसान परिवारों में सात करोड़ कर्जदार हैं।

पूरे देश के किसानों पर आठ लाख करोड़ का कर्ज है।पहले सूखा पड़ने पर भी किसान आत्महत्या नहीं करता था और अब देश में हर साल 12 से 15 हजार किसान आत्महत्या करते हैं।1995 से अब तक 3 लाख 11 हजार किसान आत्महत्या कर चुके हैं।अगर कहीं 100 लोग मर जाएं तो हम दुख की वजह से खाना तक नहीं खाते,लेकिन लाखों किसानों की आत्महत्या पर भी किसी की नींद नहीं खुली।दीपक छाबड़ा ने कहा 1970 में एक क्विंटल गेहूं का मूल्य 100 रुपये और एक तोले(10 ग्राम)सोने का मूल्य 150 रुपये था।आज एक क्विंटल गेहूं केवल 1500 से दो हजार रुपये क्विंटल ही बिकता है,जबकि एक तोला सोने की कीमत 30 हजार रुपये हो गई।वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रण में करने का यह मतलब नहीं होता कि फसलों के मूल्य ही न बढ़ाए जाएं।

कहा कि अमेरिका में पिछले 40 सालों से फसलों, दूध के दाम नहीं बढ़े फिर भी वहां किसानों ने आत्महत्या नहीं की क्योंकि उत्पादन का पैसा अमेरिका की सरकार देती है।ऐसे ही देश में भी सरकारों को किसानों को उत्पादन का पैसा देना चाहिए। किसानों को फसल लागत का डेढ़ गुना मूल्य मिलना चाहिए।अगर किसान को फसल की लागत से भी कम मूल्य दिया जाएगा तो किसान कर्जदार ही होगा।दीपक छाबड़ा ने कहा कि अन्नदाता किसान आजादी के बाद से सरकार की नीतियों के कारण तकलीफ झेल रहा है।आज किसान दुखी ही नहीं है बल्कि कर्ज के बोझ तले दबा हुआ भी है।किसान जो लोगों का पेट भरता है आज उसके बच्चे ही भूखे हैं।कहा पिछले वर्षों में लाखो किसानों ने आत्महत्या की है।यह दुनिया के किसी भी देश में किया गया सबसे बड़ा नरसंहार है।यह सरकार के द्वारा किया गया नरसंहार है।उनकी नीतियों के द्वारा किया गया नरसंहार है।