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Wednesday, August 5, 2020 Search Search YouTube Menu

हिमाचल के पहाड़ों को लेकर वैज्ञानिकों की चेतावनी…

नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश के हिमालयी पहाड़ों से बर्फ तेजी से पिघल रही है। यह एक बड़ी चेतावनी है। क्योंकि अगर हिमालय की बर्फ ज्यादा तेजी से पिघली तो भविष्य में बड़ा जल संकट खड़ा हो सकता है। यह स्टडी की है हिमाचल जलवायु परिवर्तन केंद्र के वैज्ञानिकों ने। उनके अनुसार हिमाचल प्रदेश के कुल बर्फ में पिछले दो सालों में 0.72 प्रतिशत की कमी आई है। एक प्रकाशित खबर के मुताबिक वैज्ञानिकों ने बताया कि साल 2018-19 में हिमाचल में स्नो कवर 20,210 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा था। जो 2019-20 में घटकर 20,064 वर्ग किलोमीटर हो गया है। इसका सीधा असर हिमाचल प्रदेश और उसके आसपास के राज्यों में रहने वाले लोगों पर पड़ेगा। बर्फ में लगातार कमी गर्मियों के दौरान नदियों के प्रवाह को प्रभावित करती है। एक्सपर्ट की मानें तो बर्फ के तेजी से पिघलने के कारण आने वाले दिनों में पानी की कमी हो सकती है. हिमाचल की इन नदियों से जिन राज्यों में पानी जाता है, वहां के लिए भारी संकट हो जाएगा। जैसे- पंजाब, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर।

जलवायु परिवर्तन केंद्र ने प्रदेश में स्नो कवर एरिया की मैपिंग की। इस रिपोर्ट में ब्यास और रावी बेसिन यानी जलग्रहण क्षेत्र की स्टडी की गई। तो पता चला कि यहां बर्फ में काफी कमी आई है। जबकि सतलुज बेसिन में तुलनात्मक रूप से ज्यादा बर्फ देखी गई है। चिनाब बेसिन में अप्रैल में कुल बेसिन का 87 फीसदी हिस्सा बर्फ में था। जबकि, मई में यह घटकर 65 फीसदी हो गया. यानी चिनाब बेसिन में 22 फीसदी बर्फ घट गई।

यह अगस्त और तेजी से पिघलने की उम्मीद है। अप्रैल महीने में ब्यास बेसिन का 49 फीसदी हिस्सा बर्फ से ढंका रहता है। मई तक यह 45 फीसदी हो गया है। यानी ब्यास नदी के जलग्रहण क्षेत्र से चार फीसदी बर्फ कम हो गई है। रावी बेसिन में अप्रैल में 44 फीसदी था जो मई में घटकर करीब 26 फीसदी पहुंच गया। यानी 18 फीसदी बर्फ पिघल गई। यह एक बड़ी चेतावनी है कि ग्लोबल वॉर्मिंग और क्लाइमेट चेंज की वजह से हिमाचल के हिमालयी पहाड़ों की बर्फ तेजी से पिघल रही है।