अंग्रेजों के जमाने के बाईलाज हर साल कैंट बोर्ड का खजाना कर रहे खाली…

चाटू प्रधानों तथा दलालों के हाथों खेल रहा कैंट बोर्ड प्रशासन, कैंट में ही बोर्ड के नोटिस की वैल्यू शून्य..

जालन्धर (अनिल वर्मा/वरुण अग्रवाल)। जालन्धर कैंट बोर्ड का नाम भारत के सबसे पहले कैंट बोर्ड में शुमार है इसकी स्थापना सन्1848 दौरान हुई पहली एंगलो सिख वार के बाद उत्तर भारत में की गई थी। कैंट बोर्ड के आधीन यहां रह रहे सिविलियन को मूलभूत सुविधाएं देने के लिए कई कानून बनाए गए जिसमें बिल्डिंग बाईलाज एक अहम हिस्सा है। यह बाईलाज 1930 में बनाए गए थे तांकि यहां बन रही इमारतों तथा डिफैंस लैंड की सुरक्षा का ध्यान रखा जा सके। मगर भारत की आजादी के बाद भी इन बाईलाज का संशोधित नहीं किया गया। 90 सालों से जालन्धर कैंट में वहीं पुराना कानून आज भी लागू है।

जबकि शहरी क्षेत्र में कई बार बाईलाज संशोधित हो चुके हैं जिसमें पंजाब सरकार को हर वर्ष करोड़ों की आय होती है। मगर कैंट बोर्ड अपने 90 साल पुराने बिल्डिंग बाईलाज की वजह से लगातार घाटे में हैं। यहां सिविल एरिया में पुरानी इमारतों को रिपेयर करवाने की आढ़ में कई चाटू प्रधान तथा दलाल जमकर कैंट बोर्ड का खजाना लूट रहे हैं और खुलकर अवैध इमारतों को सरंक्षण दे रहे हैं।

ताजा मामला मुहल्ला नंबर 20 का है जहां गुरुद्वारा सिंग सभा के सामने एक रिहायशी खंडर को आलीशान कारोबारी शोपिंग माल में तबदील किया जा रहा है मगर कैंट बोर्ड प्रशासन इस अवैध इमारत का काम बंद करवाने की बजाए पल्ला झाड़ता दिखाई दे रहा है। यहां बीते सप्ताह कैंट बोर्ड के सीईओ ज्योति कुमार के आदेशों के बाद कैंट बोर्ड एक्ट की धारा 239 के तहत नोटिस सर्व किया गया था मगर मौके पर एक दिन भी काम बंद नहीं करवाया गया। जबकि नोटिस डिलीवर होने के तुरन्त बाद कानूनन काम बंद करके नोटिस का ज्वाब देना अनिवार्य होता है। जिसमें कैंट बोर्ड के इंजीनियर विभाग की भूमिका सबसे अधिक लापरवाही वाली नजर आ रही है।

इसी तरह मुहल्ला नंबर 13 थाने के समीप एक पार्षद के घर के समीप वाली रिहायशी बिल्डिंग को दलालों की सैटिंग के चलते कारोबारी तबदील कर दिया गया और शटर लगा दिए गए। यहां भी कैंट बोर्ड द्वारा अपनी स्किन सेफ करने के लिए नोटिस जारी किए गए थे मगर न तो काम रुका और न ही कैंट बोर्ड ने अगली कारवाई की। कैंट क्षेत्रवासी सीईओ ज्योतिकी कानूनी पावर से कहीं ज्यादा चाटू दलालों की पावर को ज्यादा त्वौजो दे रहे हैं जिससे सरकार का भी अक्स खराब होता दिखाई दे रहा है।

जानकारी के अनुसार कैंट क्षेत्र में चाटू प्रधानों तथा दलालों के संरक्षण में बनी सभी अवैध इमारतों के खिलाफ कानूनी कारवाई करने में असफल रहे कैंट बोर्ड प्रशासन के खिलाफ चंडीगढ़ पीडी कार्यलय में शिकायत देने की तैयारी की जा रही है जिसमें दलालों के साथ साथ व्हाईट कालर अफसरों के नाम भी शामिल हैं। आने वाले दिनों में कैंट में बनी अवैध इमारतों का मामला तूल पकड़ता दिखाई दे रहा है।

About the author