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Friday, February 26, 2021 Search Search YouTube Menu

EPF ब्याज पर टैक्स को लेकर बड़ी खबर!

नई दिल्ली: EPF के ब्याज पर टैक्स का फैसला सरकार वापस ले सकती है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बात के संकेत दिए हैं. वित्त मंत्री ने 1 फरवरी 2021 को पेश हुए बजट में ऐलान किया था कि PF में सालाना 2.5 लाख रुपये से ज्यादा निवेश पर जो ब्याज मिलेगा उस पर टैक्स देना होगा.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि वो EPF में 2.5 लाख रुपये सालाना टैक्स फ्री डिपॉजिट के फैसले पर विचार करने के लिए राजी हैं. सरकार ने 1 फरवरी को बजट में ब्याज पर टैक्स का प्रावधान किया था, ताकि ऊंची इनकम वाले EPF का इस्तेमाल टैक्स घटाने के लिए नहीं कर सकें. अंग्रेजी अखबर के एक इवेंट में उन्होंने कहा कि वो इस फैसले की समीक्षा करने के लिए तैयारी हैं, उन्होंने ये भी कहा कि उनका मकसद ऊंची इनकम वालों को EPF में निवेश के जरिए बचत करने से रोकना बिल्कुल नहीं है.

वित्त मंत्री ने कहा कि हमने ये तय किया था कि हम उन्हें निराश नहीं करेंगे जो EPF में निवेश करके 15,000 रुपये महीना से ज्यादा कमाते हैं, 2.5 लाख रुपये की लिमिट को लेकर चर्चा कभी भी की जा सकती है, मैं इसकी समीक्षा कर सकती हूं. लेकिन ये सिद्धांतों की बात है. हम सिर्फ उनको छू रहे हैं जो EPF में एक भारतीय की महीने की औसत कमाई से कहीं ज्यादा डाल रहे हैं.

इसके अलावा वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि EPF और National Pension Scheme का विलय करने का कोई इरादा नहीं है, ये जैसे आज हैं वैसे ही आगे भी रहेंगे. मिडिल क्लास को EPF से होने वाली एक तय आय को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कहा कि मैं चाहूंगी ये ऐसे ही रहे. बजट 2021 पर उन्होंने कहा कि जो भी आंकड़े दिए गए हैं, वो हासिल करने योग्य हैं.

विनिवेश के लक्ष्य पर उन्होंने कहा कि ‘जो लक्ष्य हमने रखा है वो दिखने में साधारण जरूर है, लेकिन मैं खड़े होकर बाद में ये कहूं कि मैं गलत हो गई, बेहतर होगा में सतर्क रहूं.’ कौन से सरकारी बैंक का निजीकरण होगा, इस पर उन्होंने कहा कि ‘अबतक ये तय नहीं हुआ है.’ दरअसल, काफी दिनों से कुछ सरकारी बैंकों के नाम मार्केट में घूम रहें हैं, और ये दावा किया जा रहा है कि इनका निजीकरण होगा.

पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी वित्त मंत्री ने कहा कि- केंद्र और राज्य सरकारों को एक साथ बैठना होगा, और ये देखना होगा कि इस मुद्दे से बेहतर तरीके से कैसे निपटा जा सकता है. GST के दायरे में लाना एक विकल्प हो सकता है, इससे पूरे देश में पेट्रोल-डीजल के दाम एकसमान हो जाएंगे. GST काउंसिल को इस पर विचार करना चाहिए.